एक घर मोहल्ले में ऐसा भी

हंसी जिस घर की ईंट-ईंट से फूटती हो और जिसकी दीवारों के परावर्तन से आपके तनावों का राम नाम सत्य हो जाता हो , हर मोहल्ले में एक अदद घर ऐसा जरूर होता है। ऐसा ही एक अदद घर हमारे मोहल्ले में भी है , जिसे प्यार से हम लोग ‘पागलों का घोंसला’ बुलाते थे।

घर में तीन स्त्रीलिंग और दो पुल्लिंग थे। दो स्त्री और एक पुरूष को ईश्वर ने बाल्टी भर-भर के दिमाग दिया था जबकि एक स्त्री व एक पुरूष दिमाग से निरा पैदल थे। अपनी-अपनी योग्यताएं समय-समय पर ये लोग बखूबी साबित भी करते थे।

घर की बेटी बारहवीं पास करके अब कॉलेज जाने की तैयारी में थी। लेकिन उसका नाम कॉलेज की मेरिट लिस्ट में नहीं आया , जिससे उन्हें दाखिला न मिल सका। माँ-बेटी तुरत-फुरत कॉलेज पहुंचे , सीधा प्रिंसिपल के रूम में। माँ ने पूँछा कि सर मेरी बिटिया को दाखिला क्यों नहीं दिया। सर बोले कि सीट नहीं बची अब कॉलेज में। माँ तपाक से बोली कि ये बात है तो गाना बढ़ई से सीट के लिए बोल देते थे। प्रिंसिपल साहब ये सुनकर लगभग अचेत से हो गए।

गर्मी से बेहद हलकान ठन्डे पानी की चाह में इन्होंने एक फ्रिज लेने का मन बनाया। अपनी औकात के मुताबिक़ किसी नॉन ब्रांडेड कंपनी की फ्रिज उठा लाये। अभी हफ्ते भर ही बीता था कि इनके घर की बड़ी बेटी किन्तु मानसिक रूप से छोटी बेटी ने फ्रिज के दरवाजे को पहले झटके से खोला फिर बंद किया और फिर आनन-फानन पुनः अभिमन्यु के दस हज़ार हाथियों सा बल लगाकर दरवाजे को खोला। लेकिन ये क्या दरवाजा फ्रिज से अलग होकर इनके सहित जमीदोंज हो गया। पूरे घर में मातम पसर गया। रही-सही कसर मोहल्ले वालों की भालें सी चुभनी वाली सहानुभूति ने पूरी कर दीं।

पूरा परिवार एक मोर्चे पर बेहद समानता लिए हुए था। खूब टीवी देखते थे घर भर। एक दिन टीवी पर नापतौल पर एक प्रचार आ रहा था कि लैपटॉप मात्र 2500₹ में। होशियार बिटिया ने फोन करके आर्डर कर दिया। तीन दिन बाद कोरियर वाला बिल्कुल देवदूत सा आर्डर लेके पहुंचा। उसके जाने के बाद आर्डर को बाकायदा दिया दिखाकर खोला गया। लेकिन ये क्या , इसमें तो किड्ज लैपटॉप था। जिसमे बच्चों के लिए गिनती-पहाड़ा-एबीसीडी थे और कुछ छिटपुट गेम थे। अब पूरे परिवार को काटो तो पानी नहीं।

चूँकि ये लोग एक कमरे के कर्मचारी आवास में रहते थे। सो अक्सर बाहर खटिया वैगरह डाल के बैठ जाते थे। ऐसे ही एक दिन परिवार की महिला मुखिया खटिया पर दिन भर की थकी-हारी बेसुध लेटी थी। नीचे मच्छर को भगाने के लिए गोबर की उपले सुलगा दी गयी थी। और जमीन पर बैठा उनका लड़का खटिया से टेक लिए लगभग सो ही रहा था। कि तभी एक महिला उधर से गुजरी , उन्हें शक हुआ कि माता जी तो निकल लीं। पूरे मोहल्ले में गुहार कर दीं। अभी सब लोग गला फाड़ने ही वाले थे कि माता जी आँख मींचते हुए उठ खड़ी हो गयी।

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मैं जीवन॥ को अभी समझ ही रहा हूँ..........

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