मोहल्ले के दुर्गा पूजा पंडाल

मोहल्ले के दुर्गा पूजा पंडाल

नवरात्रि की पंचमी के दिन टेंट, बल्ली, पटरा, तख़्ता आदि चौराहे पे आ जाता है। उसी दिन रात तक इन्हें करीने से सजा दिया जाता है। अगले दिन ‘माँ दुर्गा’ की प्रतिमा अन्य देवताओं संग उसी पंडाल में स्थापित कर दी जाती है।

सुबह-शाम की आरती, दैनिक रात्रिकालीन रंगारंग कार्यक्रम, जगराता, माँ की चौकी आदि कार्यक्रम सभी मोहल्लेवासियों की दिनचर्या का हिस्सा हो जाते है। यही पंडाल उन बूढ़े हो रहे बच्चों के लिए आशा की किरण भी होते है, जो बेचारे दिन के स्कूल, शाम के ट्यूशन और रात के होमवर्क की वजह से ‘लव डोज’ नहीं पाते है।

रिंकी अपनी मम्मी के संग पंडाल में दाखिल होती है, और आते मान विभा और रूपा आंटी को खोजना शुरू कर देती है। वो घूर-घूर के आंटी को निहारती है ताकि आंटी उसकी मम्मी को बुला लें और उसे भी पोगो प्रीतम मिल जाये, वो कामयाब भी हो जाती है अपनी इस मुहिम में। अब रिंकी की नजरें चुनमुन और डैजी को खोजती है।

त्रिगुट होते ही ये पंडाल के पीछे वाली कुर्सियों में बैठ जाती है। श्याम, राहुल और शिवम का त्रिगुट जो सुबह से इस इंतज़ार में था कि कोई तो आ जाये कम्बखत। जैसे ही लड़कियों के त्रिगुट को देखता है, भगवान पे इनका खोया हुआ यकीं वापस लौट आता है।

नयन मटक्का के दौर शुरू हो जाते है, खींस का एक्सचेंज ऑफर चलता है, प्रसाद वितरण में लगा राहुल अपनी कथित भाभी को दो अंजुरी प्रसाद देता है, आखिर उसे भी अपना जुगाड़ जो फिट कराना है।

इसी बीच बच्चों के रंगारंग कार्यक्रम वाली संध्या आती है। जहाँ पर भूतपूर्व नौजवान दिनेश बाबू अपनी मंडली के संग पहुँचते है। और पहुँचते ही किसी ज़माने की अपनी बेटर हॉफ पिंकी को बच्चे को चुप कराते हुए पाते है। दिनेश बाबू के लिए ये ‘छलनी कर दें सीना मेरा’ मूमेंट होता है।

अब दिनेश बाबू को पिंकी को ये दिखाना होता है कि वो उसके बिना भी बहुत खुश है और उनके पास पिंकी के पति से ज्यादा दौलत-शोहरत है। सो ‘मैय्या यशोदा ये तेरा कन्हैय्या’ प्रोग्राम पे 51 रुपये का नगद पुरस्कार देते है, फ़िर ‘राधा तेरी चुनरी पे ‘ 101 का पुरस्कार देते है। मगर अब भी पिंकी जी के चेहरे पे चिढ़ाने वाली दर्प मुस्कान देखते है तो खौल के अगले गाने ‘श्री गणेशा’ पर 501 रुपये का नगद पुरस्कार दे देते है।

पुराने एक्स के इस पागलपन पे बच्चे और बच्चियों के माता-पिता की मौज रहती है। वो सोचते है कि साला कल ही तो मोबाइल में डाउनलोड करके बच्चे को नाच सिखाये थे और नाच भी कहाँ सीख पाया था बच्चा, बस इधर-उधर कमर ही मटका पा रहा था। मगर ई का दिनेश जौहरी ने बच्चे की क्या खूब क़द्र कर ली, न सिर्फ क़द्र की बल्कि नगद रुपयों से तराश भी दिया और फिर मन ही मन कहते है कि ‘अगले बरस फिर आना मैय्या’।

आँखों देखी कहने वाला स्वयंभू मोहल्ला पत्रकार,
संकर्षण शुक्ला,
इंदिरा नगर
रायबरेली से।

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मैं जीवन॥ को अभी समझ ही रहा हूँ..........

One Response

  1. mx player pro
    mx player pro at | | Reply

    Tһis post іs priceless. How can I fіnd out morе?

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