प्यारी रिम्मी

प्यारी रिम्मी

तुम्हारे गम में आज रम पी रहे है और तब तक पिएंगे जब तक अस्पताल न पहुँच जाये।काहे कि तभी तुम हमको भाव दोगी।आशिकी 2 देखकर तुम जैसी लौंडियों के खूब भाव बढ़ गए है।साला जब तक हम जैसा लौंडा दारू पीकर अस्पताल न पहुँच जाये या सड़क पर लोटने न लगे।तुम लोग की नजरों में वो आशिकी का मिर्जा हो ही नहीं पाता।

अलबत्ता इतना हमारे हाथ में था , हमने किया भी और बलभर किया।लेकिन यहाँ पर भी साहिबा के भाई जैसे तुम्हारे भाई आ गए फटे में टांग अढ़ाने।ये साला भाई लोग किसी दूसरे की बहन को छोड़ेंगे नहीं और अपनी बहन को मजाल है कि कोई आँख उठाकर भी देख लें।

पिछले चार दिनों से तुमने अपने चार बरस पुराने प्यार की लंका लगा रखी है। आंसू के लोर लिये हर बार यही दोहराती हो कि पापा खत्म हो गए है और भाई ही हमें पढ़ा रहे है।हम उन्हीं के कहे हिसाब शादी करेंगे।वो जहाँ भी हमें झोंक देंगे;लूले , लंगड़े , काने , सबके संग हम निर्वाह कर लेंगे।

अबे!ये बात चार साल पहले क्यों नहीं सोची थी।जब हमें मिसकॉल दी थी और किसकॉल रिसीव की थी और थोक के भाव में रिसीव किये जा रही थी, काहे कि यूनिनॉर अनलिमिटेड जो था। आज जो अपने भैया के कहने पर “मेरी प्यारी बहनिया बनेगी सत्यप्रकाश की दुल्हनिया और श्यामू चाट वाले भैया बजायेंगे बाजा” खेल रही हो।

कहे देते है कि अगर किसी और की बारात हमारे सिवाय तुम्हारे दरवाजे पहुंची तो फिर तमंचे पे ही डिस्को होगा।

छलनी हुए सीने के साथ
पिंटू

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मैं जीवन॥ को अभी समझ ही रहा हूँ..........

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