मेरी प्यारी रिम्मी,

एतने जतन से तुमको 7-8 साल पियार का ककहरा सिखाये और पाठ पढ़ना सीखते ही तुम केहू और के लव के स्कूल केर माहटाराइन बन गईलू। बतिया अगर एतनी भी होती तो हम बर्दाश्त क़ै लेते। लेकिन बीटेक्स वाले ने तुमको फांसा है, ई आपन इज्जत पे दाग है।

आज फिर साबित हो गया है कि प्रीत के धागा केतना भी जोड़ जाड़के रखो ; एक दिन मैकेनिकल इंजिनियर टाइप कूल ड्यूड आता है और सब खोल खाल के अपने संगवा ले जाता है।

बाप से चोरी करके तुम्हे नोकिया का 1661 दिलवाए थे । कभी भी तुम्हारी कॉल रिसीव नहीं होने दिया,जो किसी यार ने गलती से रिसीव भी कर ली तो उसकी छटी पसनी एक कर दिए। फिरो यार तुम हमा न भईलु।

तुमको उस मिसकॉल की कसम मत जाओ छोड़ के हमार सुगनी जो तुम हमें रात-दिन पेलती रहती थी ।
खुद कभी राधे नाऊ से आगे नहीं बढ़ पाये थे, लेकिन तुम्हारी भौहें मिडास में ही सेट करवाते थे। भले इसके लिए तीस किलो गेंहू के आटे से दो किलो आटा मसकना पड़े। तुमको उस छिली हुई भौहों की एक-एक बाल की कसम मत जाओ छोड़ के यार हमें।

यार!भूल गयी मंगनी की गाडी पे बैठा के तुम्हें पूरा शहर घुमवाते थे। भले ही हमार पेट्रोल निकल जाये। दोनों हाथ पसार के तुम भी खूब इलू-इलू चुहुचुहाती थी। हर पचास कदम पर मारी गयी एक-एक ब्रेक की कसम सुगनी मत जाओ छोड़ के मुझे।

इंदिरा उद्यान की गड़ने वाली घासों पर हम-तुम मछली नियन लोटते थे। महानंदपुर से सटी गार्डन की झाड़ियां आज भी चीख चीख कर अपने प्यार की गवाही देती है। जो तुम्हारा नाम गोदे थे गार्डन की दीवार पर, वो आज भी उसी तरह सुरक्षित है। ख़ाली तुम धोखा दे दी हूँ , गुदे हुए नाम की कसम मोर सुगनी मत जाओ छोड़ के।

तुम्हारे फेरा में केतने आशिकों की हमने लंका लगा डाली। जो कॉलेज में कोई तुम्हारी आँख भी उठा के देख ले, तो उसकी खटिया खड़ी करके बिस्तरा गोल कर देता था। एक बार तो एक लौंडे की खोपड़ी भी खोल दिए थे तुम्हारे चक्कर में। उसके सिर से गिरी लहू क़ी एक – एक बूँद की कसम मत जाओ सुगनी मोहे छोड़ के।

तुम्हारा अपना
पिंटू

 

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मैं जीवन॥ को अभी समझ ही रहा हूँ..........

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